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रायपुर: ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में धूमधाम से मनाया गया भगवान महावीर जन्मोत्सव

2026-09-13 17:34:05 bhaskar_hindi
रायपुर: ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में धूमधाम से मनाया गया भगवान महावीर जन्मोत्सव

रायपुर के विवेकानंद नगर स्थित श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में पर्युषण महापर्व के चौथे दिन भगवान महावीर स्वामी का जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान माता त्रिशला के 14 सपनों के चांदी के प्रतीकों के दर्शन कराए गए।


रायपुर: राजधानी के विवेकानंद नगर स्थित श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में चल रहे वर्षावास के दौरान शनिवार को पर्युषण महापर्व के चौथे दिन भगवान महावीर स्वामी का जन्मोत्सव अत्यंत भक्तिमय और उत्साहपूर्ण माहौल में मनाया गया। मुनिश्री संवेगरत्न सागर जी म.सा. द्वारा भगवान महावीर के जन्म की घोषणा किए जाने के साथ ही पूरी धर्मसभा जयकारों से गूंज उठी।

जन्मोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने फूल और अक्षत अर्पित किए तथा थाली व घंटियां बजाकर अपनी खुशी जाहिर की। मुनिश्री ने भगवान महावीर के जन्म से जुड़ी कथा का विस्तार से वर्णन किया। इसके पश्चात, पालना जी के लाभार्थी परिवार ने भगवान को पालने में झुलाया और मंगलगीत गाए। श्रद्धालुओं ने भी पालना झुलाकर एक-दूसरे को बधाई दी और केसरिया छापे लगाए।

माता त्रिशला के 14 सपनों का महत्व

धर्मसभा में मुनिश्री संवेगरत्न सागर जी म.सा. ने माता त्रिशला देवी को भगवान महावीर के जन्म से पूर्व आए 14 सपनों का आध्यात्मिक महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि सफेद हाथी, बैल और सिंह ताकत व अच्छे गुणों का संकेत हैं, जबकि लक्ष्मी, फूलों की माला, चंद्रमा, सूर्य और धर्मध्वजा शुभता, शांति, ज्ञान और धर्म के प्रतीक हैं। पूर्ण कलश, कमल का सरोवर, क्षीरसागर, दिव्य विमान, रत्नों की राशि और बिना धुएं की जलती अग्नि जीवन के विभिन्न उच्च मूल्यों और शुद्धता का संदेश देती है।

चांदी के प्रतीकों के हुए दर्शन

चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुनिया और महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को माता त्रिशला के 14 सपनों के चांदी से बने अद्भुत प्रतीकों के दर्शन कराए गए। लाभार्थी परिवारों ने विधि-विधान से इन प्रतीकों को बधाया और मोतियों की माला पहनाई। समिति की ओर से लाभार्थी परिवारों का सम्मान कर उन्हें 14 सपनों की प्रतिकृति भी भेंट की गई।

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