छुड़ीकला और ग्रामीण इलाकों में किसान संस्कृति के प्रतीक पोला तिहार पर बैलों की पूजा की गई। हालांकि, बदलते दौर के साथ अब बाजारों में मिट्टी के बैलों और खिलौनों की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है।
छुरीकला: भादो कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि के अवसर पर गुरुवार को छुरीकला नगर समेत आसपास के ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक छत्तीसगढ़ी पर्व 'पोला' बड़े ही उत्साह के साथ मनाया गया। किसान संस्कृति से जुड़े इस खास पर्व पर लोगों ने खेती-किसानी में महत्वपूर्ण सहयोग देने वाले बैलों की विशेष पूजा-अर्चना की और उनके प्रति अपना आभार व्यक्त किया।
त्योहार के मद्देनजर स्थानीय बाजारों में मिट्टी से बने बैल और पारंपरिक खिलौना 'चुकिया' की दुकानें भी सजी थीं, जहां खरीदारों की भीड़ नजर आई। यह पर्व पशुओं की सुरक्षा और उनके संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश भी देता है। लोगों ने बैलों को छत्तीसगढ़ी व्यंजन और पकवान खिलाए।
बदल रहा है परंपरा का स्वरूप
मिट्टी के बर्तन और खिलौने बनाने वाले स्थानीय कारीगर ओम लाल कुम्हार ने बताया कि पहले के मुकाबले अब मिट्टी के बैल और खिलौनों की भारी बिक्री में कमी आई है। बदलते दौर और आधुनिकीकरण के कारण अब लोग लकड़ी से बने बैलों की पूजा करने लगे हैं, जिसके चलते पारंपरिक रूप से बनने वाले मिट्टी के खिलौनों की मांग लगातार घट रही है।
लुप्त हो रहे हैं पारंपरिक खेल
इसके अलावा, ग्रामीण संस्कृति से जुड़े आयोजनों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। नगर से सटे गांवों में पहले पोला पर्व के दौरान बैल दौड़, कबड्डी और कुश्ती जैसी पारंपरिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता था, जो अब धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं और ग्रामीण अंचलों में अब यह कम ही देखने को मिलती हैं।