छत्तीसगढ़ के बिरकोनी क्षेत्र में पारंपरिक भोजली पर्व आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। पारंपरिक गीतों और गाजे-बाजे के साथ महानदी में भोजली का विधि-विधान से विसर्जन किया गया।
बिरकोनी: छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के अहम पर्व 'भोजली' को बिरकोनी क्षेत्र के ग्राम बड़गांव और नयापारा में गुरुवार को पूरी आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। पोला पर्व के अवसर पर शाम 4 बजे गाजे-बाजे के साथ निकली भोजली विसर्जन की शोभायात्रा ने पूरे माहौल को छत्तीसगढ़ी रंग में रंग दिया।
सात दिनों तक चले इस अनुष्ठान में बालिकाओं ने उपवास रखकर भोजली माता की पूजा-अर्चना और श्रृंगार किया। धान और गेहूं के अंकुरित पौधों (भोजली) को सिर पर धारण कर पारंपरिक परिधानों में सजी बालिकाएं शोभायात्रा में शामिल हुईं। बड़गांव में घरों से और नयापारा में मां चंडी मंदिर से शुरू हुई यह यात्रा मुख्य मार्ग, बाजार चौक और भाठापारा से गुजरी, जहां श्रद्धालुओं ने जगह-जगह स्वागत कर नारियल चढ़ाया।
आपसी भाईचारे और 'मितान' का संदेश
विसर्जन के दौरान ग्रामीणों ने एक-दूसरे के कान में भोजली खोंचकर शुभकामनाएं दीं। इस दौरान आपसी भाईचारे और 'मितान' (दोस्ती) का धर्म निभाने का संकल्प लिया गया। चौक-चौराहों पर कुल देवी-देवताओं की पूजा कर हल्दी पानी छिड़का गया और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की गई।
प्रकृति के प्रति आभार का प्रतीक
भोजली पर्व नई फसल की कामना और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रमुख जरिया है। ग्रामीणों ने क्षेत्र में खुशहाली और उत्तम फसल की पैदावार की मन्नत मांगी। अंत में विधि-विधान के साथ महानदी में भोजली का विसर्जन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे मौजूद रहे।