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हाईकोर्ट बोला- लोकतंत्र में बहुमत से आशय गैरकानूनी नहीं:भिलाई निगम कमिश्नर को हटाने की मांग, हाईकोर्ट ने 32 पार्षदों के प्रस्ताव को माना अवैध, याचिका खारिज

2026-07-02 05:59:27 bhaskar_hindi
हाईकोर्ट बोला- लोकतंत्र में बहुमत से आशय गैरकानूनी नहीं:भिलाई निगम कमिश्नर को हटाने की मांग, हाईकोर्ट ने 32 पार्षदों के प्रस्ताव को माना अवैध, याचिका खारिज

हाईकोर्ट ने भिलाई नगर निगम के कमिश्नर राजीव पांडेय को पद से हटाने की मांग को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बहुमत क...


हाईकोर्ट ने भिलाई नगर निगम के कमिश्नर राजीव पांडेय को पद से हटाने की मांग को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बहुमत का होना अपनी जगह है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया का पालन करना शासन की बुनियादी शर्त है। निगम कमिश्नर को हटाने के लिए बिना पूर्व नोटिस के सामान्य सभा में लाया गया का प्रस्ताव शुरुआत से ही अवैध था। इस मामले में जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने कहा कि बहुमत का मतलब यह नहीं है कि आप कानून और तय प्रक्रिया को ताक पर रख दें। जब तक कोई प्रस्ताव कानूनी रूप से सही प्रक्रिया से पास नहीं होता, तब तक राज्य सरकार को उसे लागू करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। दरअसल, भिलाई नगर निगम के संदीप निरंकारी, आदित्य सिंह समेत 32 निर्वाचित पार्षदों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। इसमें उन्होंने कमिश्नर राजीव पांडेय को हटाने की मांग की थी। पार्षदों का आरोप था कि कमिश्नर राजीव पांडेय मेयर-इन-कौंसिल और सामान्य सभा की मंजूरी के बिना मनमाने ढंग से वित्तीय और प्रशासनिक फैसले ले रहे हैं। सामान्य सभा में सर्वसम्मति से पारित हुआ प्रस्ताव, शासन ने किया दरकिनार पार्षदों का दावा था कि 25 मार्च 2026 को निगम के विशेष बजट सत्र के लिए बुलाई गई सामान्य सभा में छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 54 के तहत तीन-चौथाई से अधिक बहुमत से कमिश्नर को हटाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। लेकिन, इसके बाद भी राज्य सरकार ने उन्हें पद से नहीं हटाया। याचिाक में इसें लोकतंत्र और कानून का उल्लंघन बताया गया। हाईकोर्ट ने सामान्य सभा के प्रस्ताव को माना अवैध हाईकोर्ट ने मामले की समीक्षा करने के बाद पाया कि जिस 25 मार्च की बैठक में कमिश्नर को हटाने का प्रस्ताव पास हुआ, वह दरअसल विशेष बजट बैठक थी। हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ नगरपालिका (कार्य संचालन) नियम, 2016 का हवाला देते हुए कहा कि नियम 3 और 5 के तहत विशेष बैठक में केवल उसी मुद्दे पर चर्चा हो सकती है जो पहले से जारी नोटिस और एजेंडे में शामिल हो। सामान्य सभा का एजेंडे में शामिल नहीं था मुद्दा हाईकोर्ट ने कहा कि कमिश्नर को हटाने का मुद्दा एजेंडे का हिस्सा ही नहीं था। बजट पास करना और कमिश्नर को हटाना दो अलग-अलग बातें हैं। इसे किसी भी सूरत में बजट का अनुषंगी या सहायक मुद्दा मानकर आखिरी वक्त पर पेश नहीं किया जा सकता। कहा कि बहुमत का होना अपनी जगह है, लेकिन प्रक्रिया का पालन करना कानून के शासन की बुनियादी शर्त है। बिना पूर्व नोटिस के लाया गया यह प्रस्ताव शुरुआत से ही अवैध था।

इस घटना के विषय में स्थानीय सूत्रों और प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। संबंधित विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक उद्देश्य शांति बनाए रखना और प्रभावित लोगों को तुरंत सहायता प्रदान करना है।

इसके साथ ही, विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के दीर्घकालिक सामाजिक और राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। स्थानीय नागरिकों ने भी इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए हैं और प्रशासन से शीघ्र और पारदर्शी कार्यवाही की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी इस खबर को लेकर काफी चर्चा हो रही है।

इस पूरे मामले पर हमारी विशेष रिपोर्ट टीम लगातार नजर बनाए हुए है। जैसे ही इस संबंध में कोई नया अपडेट या आधिकारिक बयान जारी होगा, हम उसे तुरंत आप तक पहुंचाएंगे। ताजातरीन और निष्पक्ष खबरों के लिए हमारे पोर्टल से जुड़े रहें।

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