प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के कोयला क्षेत्र में हुए बदलावों से ऊर्जा सुरक्षा को नई दिशा मिली है। इसमें साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की कोरबा स्थित खदानों की भूमिका अहम रही है।
रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद देश के कोयला क्षेत्र में किए गए नीतिगत और संरचनात्मक बदलावों ने उत्पादन, तकनीक, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा सुरक्षा को एक नई दिशा दी है। इस बदलाव में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की प्रमुख आनुषंगिक कंपनी SECL ने देश के ऊर्जा क्षितिज पर अपनी एक मजबूत छाप छोड़ी है।
कोरबा की मेगा खदानों का योगदान
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित SECL की मेगा प्रोजेक्ट्स खदानें—गेवरा (Gevra), कुसमुंडा (Kusmunda) और दीपका (Dipka)—देश में कोयला उत्पादन की पूरी तस्वीर बदलने में कामयाब रही हैं। इन खदानों में आधुनिक तकनीक, भारी-भरकम मशीनरी और बेहतर बुनियादी ढांचे के उपयोग से उत्पादन के नए रिकॉर्ड बने हैं।
ऊर्जा सुरक्षा को मिल रही मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि SECL की इन खदानों के जरिए देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में लगातार मदद मिल रही है। नीतिगत सुधारों और उन्नत तकनीक के तालमेल से न सिर्फ उत्पादन बढ़ा है, बल्कि कार्यकुशलता और सुरक्षा मानकों में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
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