भाजपा प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के दौरे के दौरान मंत्रियों के कामकाज की शिकायतों पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने 'नो कमेंट्स' कहा। इस जवाब ने कांग्रेस शासनकाल के दौरान कवासी लखमा के वायरल 'ना कमेंस' वाले वाकये की याद दिला दी है।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर 'नो कमेंट्स' बयान सुर्खियों में आ गया है। भाजपा की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन, जब कृषि मंत्री रामविचार नेताम से मंत्रियों के कामकाज को लेकर सामने आई शिकायतों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने 'नो कमेंट्स' कहकर किनारा कर लिया।
रामविचार नेताम के इस अंदाज ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान कवासी लखमा के मशहूर 'ना कमेंस' वाले वायरल वाकये की याद ताजा कर दी है, जिस पर सोशल मीडिया पर जमकर मीम्स बने थे। हालांकि दोनों घटनाओं के राजनीतिक संदर्भ पूरी तरह अलग हैं, लेकिन नेताओं के जवाब देने के इस अनोखे अंदाज ने एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है。
स्मृति ईरानी की बैठकों में उठा शिकायतों का मुद्दा
कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित बैठकों के दौरान स्मृति ईरानी ने पार्टी के पदाधिकारियों, पूर्व सांसदों-विधायकों और वर्तमान जनप्रतिनिधियों से संवाद किया। इस दौरान कुछ मंत्रियों के कामकाज और उनके विभागों से जुड़ी शिकायतें सामने आईं। बैठक में दयालदास बघेल, टंकराम वर्मा, श्याम बिहारी जायसवाल और गजेंद्र यादव समेत कई मंत्रियों के विभागों के कामकाज पर चर्चा हुई और उन्हें व्यवस्था में सुधार लाने के कड़े निर्देश दिए गए।
सांसदों और कार्यकर्ताओं से समन्वय पर जोर
बैठक में वर्तमान सांसदों ने भी अपनी सिफारिशों पर काम न होने और अधिकारियों के रवैये को लेकर असंतोष जाहिर किया। इसके बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा को भी बैठक में बुलाया गया। स्मृति ईरानी ने साफ किया कि सत्ता और संगठन के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए और 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर करना जरूरी है।