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बिलासपुर DEO नियुक्ति विवाद: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, हटी रोक

2026-09-09 10:01:15 bhaskar_hindi
बिलासपुर DEO नियुक्ति विवाद: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, हटी रोक

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर जायसवाल की नियुक्ति पर लगी रोक हटा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल वरिष्ठता के आधार पर उच्च पद का दावा नहीं किया जा सकता।


छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर जिले के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) रामेश्वर जायसवाल की नियुक्ति पर लगी रोक को आधिकारिक तौर पर हटा दिया है। इस अहम फैसले के साथ ही रामेश्वर जायसवाल के DEO पद पर बने रहने का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु की अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि केवल सीनियरिटी (वरिष्ठता) के आधार पर कोई भी अधिकारी उच्च पद पर नियुक्ति का कानूनी दावा नहीं कर सकता है।

क्या था पूरा मामला?

बिलासपुर में पदस्थ प्राचार्य राघवेंद्र गौराहा और कामेश्वर बैरागी ने अधिवक्ता जितेंद्र पाली के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि जिले में 100 से अधिक ऐसे प्राचार्य हैं जो नियुक्त प्रभारी डीईओ से 18 साल या उससे अधिक सीनियर हैं। इसके बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग ने रामेश्वर जायसवाल को प्रभारी DEO के पद पर नियुक्त कर दिया है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद अदालत ने इस नियुक्ति पर रोक लगा दी थी।

कोर्ट की टिप्पणी और याचिका वापसी

सुनवाई के दौरान कोर्ट के संज्ञान में लाया गया कि प्रशासनिक प्रभार देना एक अस्थायी व्यवस्था है और जब तक नियम में अनिवार्य न हो, केवल वरिष्ठता के आधार पर अधिकार नहीं बनता। गरियाबंद के प्रभारी DEO राजेश चंद्राकर के मामले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि जूनियर को प्रभार देना शासन का प्रशासनिक निर्णय है, जिसमें सामान्यतः हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। अदालत द्वारा याचिका खारिज किए जाने की संभावना को देखते हुए याचिकाकर्ताओं ने खुद ही अपनी याचिका वापस ले ली, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

शिक्षक संघ ने किया स्वागत

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष और प्राचार्य संजय शर्मा ने हाईकोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक पदों के लिए योग्यता और दक्षता महत्वपूर्ण होती है, और यह फैसला पूरी तरह से न्यायसंगत है। हालांकि, विस्तृत आदेश अभी जारी नहीं होने के कारण रामेश्वर जायसवाल ने फिलहाल इस पर कुछ भी कहने से इनकार किया है।

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