बलौदाबाजार जिले में शनिवार से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण पलारी ब्लॉक का अमेठी एनीकेट उफान पर आ गया है। महानदी में जलस्तर बढ़ने से एनीकेट के ऊपर ...
बलौदाबाजार जिले में शनिवार से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण पलारी ब्लॉक का अमेठी एनीकेट उफान पर आ गया है। महानदी में जलस्तर बढ़ने से एनीकेट के ऊपर करीब 3 फीट पानी बह रहा है। इससे आसपास के दर्जनों गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क टूट गया है। अमेठी एनीकेट से आवाजाही करने वाले गांवों में अमेठी, दौनाझार, पिपरछेड़ी, रिवासरार, मुड़ीपार, सुकदा, अर्जुनी, बरबसपुर, घिरघोल, बल्दाकछार, रोहासी और खैरा शामिल हैं। ये सभी गांव थाना गिधपूरी क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। एनीकेट पर पानी होने के कारण ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है। नदी के उस पार खेती करने वाले किसान और मजदूर अपने काम पर नहीं जा पा रहे हैं। स्थानीय निवासी जय राम और गेंद ध्रुव ने बताया कि हर साल बारिश में एनीकेट पर पानी चढ़ जाता है, लेकिन इस बार पहली बारिश में ही जलस्तर 3 फीट से ऊपर बह रहा है। एनीकेट पूरी तरह डूबा हुआ है और आवाजाही पूरी तरह बंद है। नदी पार न करने की अपील स्थिति की गंभीरता को देखते हुए थाना गिधपुरी प्रभारी सुखेन देशमुख स्वयं अमेठी एनीकेट पहुंचे। उन्होंने नदी के जलस्तर का जायजा लिया और आसपास के ग्रामीणों को सुरक्षा संबंधी सलाह दी। देशमुख ने लोगों से अपील की, "जब तक एनीकेट के ऊपर से पानी बह रहा है, कोई भी व्यक्ति जान को जोखिम में न डाले और नदी पार करने की कोशिश न करे।" अगले 24 घंटे भारी बारिश का अनुमान उन्होंने गांवों के लोगों से संपर्क कर आपात स्थिति में तत्काल मदद पहुंचाने का आश्वासन दिया। जिला प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है। राहत और बचाव टीमों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, कुछ ग्रामीणों ने भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए एनीकेट की ऊंचाई बढ़ाने की मांग उठाई है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में और बारिश की संभावना जताई है, जिससे चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने ग्रामीणों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और किसी भी संकट की स्थिति में डायल 112 पर संपर्क करने की अपील की है।
इस घटना के विषय में स्थानीय सूत्रों और प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। संबंधित विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक उद्देश्य शांति बनाए रखना और प्रभावित लोगों को तुरंत सहायता प्रदान करना है।
इसके साथ ही, विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के दीर्घकालिक सामाजिक और राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। स्थानीय नागरिकों ने भी इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए हैं और प्रशासन से शीघ्र और पारदर्शी कार्यवाही की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी इस खबर को लेकर काफी चर्चा हो रही है।
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