छत्तीसगढ़ की राजनीति में बहस का दौर तेज हो गया है। पीएम आवास योजना से शुरू हुई यह डिबेट अब कोल माइंस, झीरम घाटी और सरकारी अस्पतालों तक पहुंच गई है।
छत्तीसगढ़ में साय सरकार के कार्यकाल के बीच राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर अब खुली बहसों यानी डिबेट पॉलिटिक्स में बदल चुका है। राज्य में पिछले एक सप्ताह के भीतर चार बड़े डिबेट चैलेंज सामने आए हैं, जिससे राजनीतिक हलचल काफी तेज हो गई है।
पीएम आवास योजना पर हुई थी पहली बहस
इस सिलसिले की शुरुआत 15 सितंबर को रायपुर प्रेस क्लब में हुई थी, जहां पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा प्रधानमंत्री आवास योजना के आंकड़ों को लेकर करीब 80 मिनट तक आमने-सामने रहे। इस बहस के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। हालांकि, कार्यक्रम के बाद प्रेस क्लब के बाहर भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी देखने को मिली, जिसमें पुलिसकर्मियों के साथ भी धक्का-मुक्की हुई।
एक के बाद एक कई ओपन चैलेंज
इस बहस के ठीक दो दिन बाद 17 सितंबर को भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को सरगुजा की कोल माइंस और हसदेव क्षेत्र के मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती दी। इसके जवाब में 19 सितंबर को डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने भूपेश बघेल को झीरम घाटी मामले पर बहस की चुनौती दी और उन्हें एक महीने तक का समय तैयारी के लिए देने की बात कही।
अब अस्पतालों की व्यवस्था पर बैज बनाम जायसवाल
राजनीतिक बहसों के इस क्रम में नया नाम कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का जुड़ गया है। 21 सितंबर को दीपक बैज ने स्वास्थ्य मंत्री को सरकारी अस्पतालों की जमीनी हकीकत देखने और वहीं चर्चा करने की चुनौती दी। स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए अस्पताल का चयन करने का अधिकार बैज को दिया है, हालांकि अभी तारीख और जगह तय होना बाकी है।