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साइबर धोखाधड़ी में 7 आरोपियों को 3-3 साल की जेल:महासमुंद कोर्ट का फैसला, म्यूल बैंक खातों से करोड़ों की हेराफेरी साबित,एक आरोपी बरी

2026-06-30 04:16:19 bhaskar_hindi
साइबर धोखाधड़ी में 7 आरोपियों को 3-3 साल की जेल:महासमुंद कोर्ट का फैसला, म्यूल बैंक खातों से करोड़ों की हेराफेरी साबित,एक आरोपी बरी

महासमुंद की अदालत ने साइबर अपराध और 'म्यूल बैंक खातों' के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी करने वाले गिरोह के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाया है। द्वितीय अपर...


महासमुंद की अदालत ने साइबर अपराध और 'म्यूल बैंक खातों' के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी करने वाले गिरोह के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश आनंद बोरकर की अदालत ने सात आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, एक आरोपी को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। यह मामला भारत सरकार के गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल से मिली सूचना के बाद सामने आया था। पोर्टल के जरिए महासमुंद पुलिस को साइबर ठगी में इस्तेमाल हो रहे संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर थाना महासमुंद में अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई। कई बैंकों में खुलवाए खाते, करोड़ों का लेन-देन तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक शरद दुबे की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, कोटक महिंद्रा बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और आईडीबीआई बैंक सहित विभिन्न बैंकों में अपने नाम से चालू और बचत खाते खुलवाए थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम के अवैध लेन-देन के लिए किया जा रहा था। अदालत में बैंक स्टेटमेंट और बैंक अधिकारियों की गवाही से यह साबित हुआ कि आरोपियों के खातों से 95 लाख रुपये, 24 लाख रुपये और 1.60 करोड़ रुपये तक के संदिग्ध ट्रांजेक्शन हुए थे। आरोपियों की ओर से इन लेन-देन का कोई वैध स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया जा सका। सात आरोपी दोषी, एक को राहत न्यायालय ने रविंदर सिंह चॉवला, महेश जैस उर्फ महेश साहू, राज चन्द्राकर, शीतल कुमार साहू, रामनारायण साहू, प्रीतम उर्फ प्रेम मारकण्डे और नौशाद साहू को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 317(2) और 61(2) के तहत दोषी ठहराया। सभी सात आरोपियों को धारा 317(2) के तहत 3-3 साल के सश्रम कारावास और 100-100 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। इसके अलावा धारा 61(2) के तहत एक-एक वर्ष का सश्रम कारावास और 100-100 रुपये का अतिरिक्त अर्थदंड लगाया गया। जुर्माना जमा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने सभी सजाएं साथ-साथ चलाने का आदेश दिया है। एक आरोपी सबूत के अभाव में बरी प्रकरण में आरोपी दीपक तिलवानी के खिलाफ महासमुंद के किसी भी बैंक में खाता होने या अवैध लेन-देन में उसकी संलिप्तता के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। इसके चलते न्यायालय ने उसे संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। हालांकि, पुलिस ने उसे गिरोह का सहयोगी मानते हुए आरोपपत्र में शामिल किया था।

इस घटना के विषय में स्थानीय सूत्रों और प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। संबंधित विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक उद्देश्य शांति बनाए रखना और प्रभावित लोगों को तुरंत सहायता प्रदान करना है।

इसके साथ ही, विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के दीर्घकालिक सामाजिक और राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। स्थानीय नागरिकों ने भी इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए हैं और प्रशासन से शीघ्र और पारदर्शी कार्यवाही की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी इस खबर को लेकर काफी चर्चा हो रही है।

इस पूरे मामले पर हमारी विशेष रिपोर्ट टीम लगातार नजर बनाए हुए है। जैसे ही इस संबंध में कोई नया अपडेट या आधिकारिक बयान जारी होगा, हम उसे तुरंत आप तक पहुंचाएंगे। ताजातरीन और निष्पक्ष खबरों के लिए हमारे पोर्टल से जुड़े रहें।

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