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नकटी गांव के विस्थापितों ने सीएम हाउस घेरा:सड़क पर बैठकर खाना खाया, 5 दिन का अल्टीमेटम, कहा- मुआवजा चाहिए, कांग्रेस बोली- बंद बुलाएंगे

2026-07-04 13:32:54 bhaskar_hindi
नकटी गांव के विस्थापितों ने सीएम हाउस घेरा:सड़क पर बैठकर खाना खाया, 5 दिन का अल्टीमेटम, कहा- मुआवजा चाहिए, कांग्रेस बोली- बंद बुलाएंगे

नकटी गांव के प्रभावित ग्रामीण शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मुख्यमंत्री आवास पहुंच गए और वहां प्रदर्शन शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री आवास के...


नकटी गांव के प्रभावित ग्रामीण शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मुख्यमंत्री आवास पहुंच गए और वहां प्रदर्शन शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने सड़क पर बैठकर भोजन किया। पुलिस ने उन्हें हटाने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि पहले उनके घर तोड़ दिए गए, अब खाना भी नहीं खाने दिया जा रहा है। इससे पहले ग्रामीणों ने मंत्री ओपी चौधरी के बंगले का घेराव किया था। वहीं, बुलडोजर कार्रवाई के बाद कई परिवार अपने टूटे हुए मकानों में बारिश और कीचड़ के बीच भी धरने पर बैठे रहे। इससे पहले वे रायपुर कलेक्ट्रेट के सामने भी प्रदर्शन कर चुके हैं और लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। पहले देखिए ये तस्वीरें... प्रशासन को 5 दिन का अल्टीमेटम ग्रामीणों ने कहा कि उनकी जमीन वापस चाहिए। तोड़े गए घरों का मुआवजा दें और लोगों पर की गई FIR वापस ली जाए। कलेक्टर ने 10 महिलाओं को मिलने बुलाया। इस दौरान उन्होंने अपनी मांग रखी। कलेक्टर ने ऊपर तक मांग पहुंचाने की बात कही। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सुनवाई नहीं हुई तो राज्यपाल के पास जाएंगे। वहां भी सुनवाई नहीं हुई तो छत्तीसगढ़ में बंद बुलाया जाएगा। 5 दिन का अल्टीमेटम देकर ग्रामीण रवाना हुए। 85 घर पर चला था बुलडोजर 3 दिन पहले नकटी गांव में 85 घरों पर बुलडोजर चला दिया गया था। बता दें कि प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को EWS मकान दिए हैं, लेकिन सभी को आवास नहीं मिला है। वहीं हाउसिंग बोर्ड का दावा है कि गांव के 77 लोगों ने 15 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा किया था। सांसद के कार्रवाई नहीं होने के आश्वासन के बाद टूटे घर बता दें कि कार्रवाई से 2 दिन पहले ही ग्रामीण सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात करने पहुंचे थे। सांसद ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि बरसात तक कोई तोड़फोड़ नहीं होगी। उन्होंने कहा था कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है। इसी बीच 29 जून को 80 घर तोड़ दिए गए। 1 साल पुरानी लिखी चिट्ठी वायरल नकटी गांव को लेकर रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल की मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखी एक साल पुरानी चिट्ठी वायरल हो रही है। जिसमें उन्होंने विधायक कॉलोनी के लिए जमीन चयन पर आपत्ति जताई थी। पत्र में कहा था कि गरीबों को हटाना मानवीय दृष्टि से उचित नहीं है। विधायक कॉलोनी दूसरी जगह शिफ्ट करने की मांग सरायपाली से कांग्रेस विधायक चातुरीनंद ने नकटी गांव तोड़ने के विरोध में सीएम साय को पत्र लिखा। उन्होंने नकटी गांव में विधायक कॉलोनी बनाने की योजना वापस लेने या नया रायपुर में कहीं कॉलोनी को शिफ्ट करने की मांग की है। विधायक ने इस पूरी घटना को अत्यंत पीड़ादायक, अमानवीय और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। 'गरीबों का घर उजाड़कर विधायक आवास नहीं चाहिए' चातुरीनंद ने पत्र में लिखा है कि, गरीबों का आशियाना उजाड़कर जनप्रतिनिधियों के लिए आलीशान आवास बनाना किसी भी तरह से सही नहीं है। जनता ने हमें उनके अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए चुना है, न कि उनके सिर से छत छीनकर अपने लिए सुविधाएं खड़ी करने के लिए। मैं इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध करती हूं और नकटी गांव के सभी पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी हूं। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि, गरीबों का घर उजाड़कर उन्हें ऐसा विधायक आवास बिल्कुल नहीं चाहिए। विधायक का सुझाव- नवा रायपुर में बनाएं कॉलोनी विधायक चातुरी नंद ने मुख्यमंत्री को पत्र के माध्यम से सुझाव दिया है कि, विधायकों के लिए आवास कॉलोनी का निर्माण बहुत जरूरी है, तो नवा रायपुर में सैकड़ों एकड़ सरकारी रिक्त भूमि उपलब्ध है। वहां एक आधुनिक और सुव्यवस्थित विधायक कॉलोनी विकसित की जा सकती है, जिससे राजधानी के किसी भी गरीब परिवार को बेघर होने की पीड़ा नहीं झेलनी पड़ेगी।

इस घटना के विषय में स्थानीय सूत्रों और प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। संबंधित विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक उद्देश्य शांति बनाए रखना और प्रभावित लोगों को तुरंत सहायता प्रदान करना है।

इसके साथ ही, विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के दीर्घकालिक सामाजिक और राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। स्थानीय नागरिकों ने भी इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए हैं और प्रशासन से शीघ्र और पारदर्शी कार्यवाही की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी इस खबर को लेकर काफी चर्चा हो रही है।

इस पूरे मामले पर हमारी विशेष रिपोर्ट टीम लगातार नजर बनाए हुए है। जैसे ही इस संबंध में कोई नया अपडेट या आधिकारिक बयान जारी होगा, हम उसे तुरंत आप तक पहुंचाएंगे। ताजातरीन और निष्पक्ष खबरों के लिए हमारे पोर्टल से जुड़े रहें।