LIVE Sat, 04 Jul 2026 --°C
Breaking News
नकटी गांव के विस्थापितों ने सीएम हाउस घेरा:सड़क पर बैठकर खाना खाया, 5 दिन का अल्टीमेटम, कहा- मुआवजा चाहिए, कांग्रेस बोली- बंद बुलाएंगे दुर्ग में अतिथि शिक्षकों का अनिश्चतकालीन हड़ताल:10 साल से आदिवासी इलाकों में पढ़ा रहे राज्य अतिथि शिक्षक बोले- 20 हजार मानदेय में नहीं चल रहा परिवार, संविलियन और समान वेतन मिले कार्रवाई:वडोदरा में गार्मेंट व्यापारी पर फायरिंग करने‎ वाले शूटर भिलाई से गिरफ्तार आईओसी टर्मिनल से निकलते टैंकरों से खुलेआम डीजल चोरी:हर रोज हो रहा लाखों का नुकसान, शिकायत से डर रहे पेट्रोल पंप संचालक, वीडियो वायरल छत्तीसगढ़ में स्कूलों में मंत्रोच्चार पर विवाद खत्म? हाईकोर्ट का बड़ा फैसला.....
Local

दुर्ग में अतिथि शिक्षकों का अनिश्चतकालीन हड़ताल:10 साल से आदिवासी इलाकों में पढ़ा रहे राज्य अतिथि शिक्षक बोले- 20 हजार मानदेय में नहीं चल रहा परिवार, संविलियन और समान वेतन मिले

2026-07-04 13:32:16 bhaskar_hindi
दुर्ग में अतिथि शिक्षकों का अनिश्चतकालीन हड़ताल:10 साल से आदिवासी इलाकों में पढ़ा रहे राज्य अतिथि शिक्षक बोले- 20 हजार मानदेय में नहीं चल रहा परिवार, संविलियन और समान वेतन मिले

छत्तीसगढ़ के राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 1 जुलाई से प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। राज्य अतिथि ...


छत्तीसगढ़ के राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 1 जुलाई से प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) कल्याण संघ छत्तीसगढ़ के आह्वान पर हजारों शिक्षक सड़कों पर उतर आए। शिक्षामंत्री के विधानसभा क्षेत्र दुर्ग में भी बड़ी संख्या में शिक्षकों ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले 10 साल से प्रदेश के आदिवासी और दूर-दराज के शासकीय स्कूलों में पढ़ाई की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो नियमित शिक्षकों जैसी सुविधाएं मिल रही हैं और न ही सम्मानजनक वेतन। उनका कहना है कि अब तक सरकार ने उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया है। काम एक जैसा तो वेतन कम क्यों? संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि राज्य अतिथि शिक्षक नियमित व्याख्याताओं की तरह ही पढ़ाई कराते हैं, लेकिन उन्हें केवल 20 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है। यह मानदेय भी सिर्फ 10 महीने के लिए मिलता है। वहीं नियमित शिक्षकों को इससे कई गुना अधिक वेतन, सेवा सुरक्षा और दूसरी सरकारी सुविधाएं मिलती हैं। शिक्षकों का कहना है कि जब काम एक जैसा है तो वेतन और सुविधाओं में इतना बड़ा अंतर क्यों है। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि उन्हें हर साल नए शैक्षणिक सत्र में फिर से नियुक्ति का इंतजार करना पड़ता है। इससे नौकरी को लेकर हमेशा असमंजस बना रहता है। उनका कहना है कि इस वजह से हजारों परिवार आर्थिक और मानसिक परेशानी झेल रहे हैं। छुट्टियों का भी नहीं मिल रहा लाभ संघ का कहना है कि 10 साल की सेवा के बाद भी उन्हें ग्रीष्मकालीन अवकाश का मानदेय नहीं दिया जाता। इसके अलावा नियमित अवकाश और मातृत्व व पितृत्व अवकाश जैसी सुविधाओं का भी पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से ये मांगें सरकार के सामने रखी जा रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि विधानसभा और विभागीय बैठकों में भी कई बार राज्य अतिथि शिक्षकों के मुद्दे उठाए गए। चुनाव के दौरान मोदी की गारंटी में भी राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) के संविलियन या समायोजन का वादा किया गया था। सरकार बनने के बाद भी इस दिशा में कोई फैसला नहीं होने से शिक्षकों में नाराजगी है। इन प्रमुख मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे शिक्षक • मोदी की गारंटी के अनुसार राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) का संविलियन या समायोजन किया जाए। • समान काम के लिए समान वेतन लागू किया जाए। • सभी राज्य अतिथि शिक्षकों को सेवा सुरक्षा दी जाए। • ग्रीष्मकालीन अवकाश का पूरा मानदेय दिया जाए। • मातृत्व, पितृत्व और अन्य वैधानिक अवकाश का लाभ दिया जाए। • 10 साल की सेवा को मान्यता देते हुए स्थायी और न्यायसंगत सेवा नीति बनाई जाए।

इस घटना के विषय में स्थानीय सूत्रों और प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। संबंधित विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक उद्देश्य शांति बनाए रखना और प्रभावित लोगों को तुरंत सहायता प्रदान करना है।

इसके साथ ही, विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के दीर्घकालिक सामाजिक और राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। स्थानीय नागरिकों ने भी इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए हैं और प्रशासन से शीघ्र और पारदर्शी कार्यवाही की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी इस खबर को लेकर काफी चर्चा हो रही है।

इस पूरे मामले पर हमारी विशेष रिपोर्ट टीम लगातार नजर बनाए हुए है। जैसे ही इस संबंध में कोई नया अपडेट या आधिकारिक बयान जारी होगा, हम उसे तुरंत आप तक पहुंचाएंगे। ताजातरीन और निष्पक्ष खबरों के लिए हमारे पोर्टल से जुड़े रहें।

Related