बिलासपुर में नगर निगम द्वारा पानी टंकियों की हर छह महीने में सफाई के दावे झूठे साबित हुए हैं। दीवारों पर दर्ज पिछली सफाई की तारीखों से यह खुलासा हु...
बिलासपुर में नगर निगम द्वारा पानी टंकियों की हर छह महीने में सफाई के दावे झूठे साबित हुए हैं। दीवारों पर दर्ज पिछली सफाई की तारीखों से यह खुलासा हुआ है कि कई टंकियों की सफाई निर्धारित समय पर नहीं की गई है। व्यापार विहार स्थित 21 लाख लीटर क्षमता वाली पानी टंकी की सफाई हाल ही में की गई। इस प्रक्रिया में लगभग चार घंटे लगे, जिसके बाद टंकी से 20 बाल्टी रेत, काई, टंकी की दीवारों का मलबा और मटमैला गंदा पानी निकला। जानकारी के अनुसार, व्यापार विहार टंकी पर पिछली सफाई की तारीख 3 अगस्त 2025 दर्ज थी, जबकि शहर की सबसे बड़ी 22.50 लाख लीटर क्षमता वाली कुदुदंड पानी टंकी की सफाई 15 मार्च 2025 के बाद से नहीं हुई है। टंकियों की समय पर सफाई न होने से लोगों के घरों तक गंदा और मटमैला पानी पहुंचने की आशंका है, जिससे आमजन के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। टंकियों की सफाई के सत्यापन के लिए दीवारों पर पिछली और अगली सफाई की तारीखें दर्ज की जाती है, और यदि ये तारीखें अनुपस्थित हैं, तो यह सफाई ठेके में अनियमितता का संकेत है। नगर निगम की उपनेता संतोषी रामा बघेल ने आरोप लगाया कि उन्हें व्यापार विहार पानी टंकी की सफाई की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि शाम को पानी आपूर्ति के समय या किसी वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में भी कोई जानकारी साझा नहीं की गई। नल खोलते ही गंदा पानी.. वार्ड क्रमांक 62 शास्त्री नगर के पार्षद सीमा राजेश शुक्ला का कहना है कि कपिल नगर के कई घरों में कई महीने से नल खोलते साथ गंदा, मटमैला पानी आने लगता है, कुछ देर बाद वह साफ हो जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि टंकियों की सफाई साल साल भर बाद होती है, पहले सफाई की पूर्व सूचना दी जाती है, जिससे पता चलता था कि टंकी की सफाई हो रही है। विष्णुनगर में भी गंदा पानी पूर्व पार्षद परमेश्वर यादव ने आरोप लगाया कि अमृत मिशन की लाइन से जोड़ने के बाद घरों में गंदा पानी आने की शिकायतें आ रही हैं। इसके बारे में मैंने खुद कलेक्टर, विधायक और जल संसाधन विभाग को पत्र लिखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि टंकी की सफाई व्यवस्थित ढंग से नहीं हो रही। क्लोरीन पर 1.20 करोड़ खर्च आधिकारिक जानकारी के अनुसार नगर निगम एरिया की पानी टंकियों में सोडियम हाइपो क्लोराइड और मोटर पंप मंन लिक्विड क्लोरीन की सप्लाई पर साल भर में तकरीबन 70 लाख रूपए व्यय किए जाते हैं। इसी प्रकार अमृत मिशन योजना के अंतर्गत बिरकोना स्थित ट्रीटमेंट प्लांट की दो बड़ी पानी टंकियों में क्लोरीन पर करीब 50 लाख रुपए व्यय किए जाते हैं। नल जल विभाग के प्रभारी के मुताबिक शहर भर की 60 पानी टंकियों की सफाई पर 4 लाख रुपए व्यय किया जाता है। नल जल विभाग प्रभारी के ईई अनुपम तिवारी से सीधी बात: सवाल: टंकियों की सफाई साल भर से नहीं हुई, कब कब सफाई होती है, सत्यापन कैसे होता है? जवाब: दिसंबर- जनवरी में शहर की 60 पानी टंकियों की सफाई कराई गई थी, वर्ष में दो बार यानी 6-6 महीने में टंकियों की सफाई कराई जाती है। सत्यापन जीपीएस फोटोग्राफ से होता है। सवाल: टंकियों से निकलने वाली रेत, काई और गंदा मटमैला पानी लोगों के लिए कितना नुकसानदायक होगा? जवाब: क्लोरीनेटेड वाटर होने के कारण टंकी की दीवारों में कुछ केमिकल की परत जम जाती है, इसकी सफाई कराई जाती है। क्लोरीनेशन के चलते टंकी में काई नहीं आती, सप्लाई होने वाले पानी की प्रतिदिन सैंपलिंग की जाती है, ताकि लोगों को शुद्ध पानी प्राप्त हो।
इस घटना के विषय में स्थानीय सूत्रों और प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। संबंधित विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक उद्देश्य शांति बनाए रखना और प्रभावित लोगों को तुरंत सहायता प्रदान करना है।
इसके साथ ही, विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के दीर्घकालिक सामाजिक और राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। स्थानीय नागरिकों ने भी इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए हैं और प्रशासन से शीघ्र और पारदर्शी कार्यवाही की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी इस खबर को लेकर काफी चर्चा हो रही है।
इस पूरे मामले पर हमारी विशेष रिपोर्ट टीम लगातार नजर बनाए हुए है। जैसे ही इस संबंध में कोई नया अपडेट या आधिकारिक बयान जारी होगा, हम उसे तुरंत आप तक पहुंचाएंगे। ताजातरीन और निष्पक्ष खबरों के लिए हमारे पोर्टल से जुड़े रहें।