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'शिक्षा की कमी से पैदा होता है अंधविश्वास': होसबाले बोले- भारतीय परंपरा में विज्ञान और आध्यात्मिकता अलग नहीं
2026-04-17 21:41
'शिक्षा की कमी से पैदा होता है अंधविश्वास': होसबाले बोले- भारतीय परंपरा में विज्ञान और आध्यात्मिकता अलग नहीं
'शिक्षा की कमी से पैदा होता है अंधविश्वास': होसबाले बोले- भारतीय परंपरा में विज्ञान और आध्यात्मिकता अलग नहीं, RSS General Secretary Dattatreya Hosabale states Indian tradition science and spirituality are not separate
Hormuz: होर्मुज सुरक्षा को लेकर पेरिस में बड़ा सम्मेलन, भारत पर्यवेक्षक बना; मैक्रों-स्टार्मर ने की अध्यक्षता
2026-04-17 21:03
Hormuz: होर्मुज सुरक्षा को लेकर पेरिस में बड़ा सम्मेलन, भारत पर्यवेक्षक बना; मैक्रों-स्टार्मर ने की अध्यक्षता
Hormuz: होर्मुज सुरक्षा को लेकर पेरिस में बड़ा सम्मेलन, भारत पर्यवेक्षक बना; मैक्रों-स्टार्मर ने की अध्यक्षता, India attends France- and UK-led summit on Strait of Hormuz News In Hindi
World Heritage Day: विकास की चकाचौंध में खो गई विरासत, दिल्ली की तंग गलियों में उपेक्षित पड़ी हैं कई धरोहर
2026-04-17 20:41
World Heritage Day: विकास की चकाचौंध में खो गई विरासत, दिल्ली की तंग गलियों में उपेक्षित पड़ी हैं कई धरोहर
चमकती सड़कों, ऊंची इमारतों और आधुनिक ढांचे के बीच दिल्ली आज विकास की तेज रफ्तार पर दौड़ रही है।
US Iran Talk: अमेरिका-ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत इसी सप्ताहांत हो सकती है, राष्ट्रपति ट्रंप ने दिए संकेत
2026-04-17 20:25
US Iran Talk: अमेरिका-ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत इसी सप्ताहांत हो सकती है, राष्ट्रपति ट्रंप ने दिए संकेत
US Iran Talk: अमेरिका-ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत इसी सप्ताहांत हो सकती है, राष्ट्रपति ट्रंप ने दिए बड़े संकेत Donald Trump suggests second round of direct US-Iran talks could happen this weekend
होर्मुज खुला या नहीं?: ईरान की सरकारी मीडिया ने अराघची के फैसले पर उठाए सवाल, रास्ता खुलने के दावों पर संशय
2026-04-17 19:36
होर्मुज खुला या नहीं?: ईरान की सरकारी मीडिया ने अराघची के फैसले पर उठाए सवाल, रास्ता खुलने के दावों पर संशय
होर्मुज खुला या नहीं?: ईरान की सरकारी मीडिया ने अराघची के फैसले पर उठाए सवाल, रास्ता खुलने के दावों पर संशय, Iranian media reports challenge to Abbas Araghchi post declaring Hormuz open News In Hindi
GT vs KKR: शुभमन गिल की दमदार पारी से जीती गुजरात टाइटंस, कोलकाता को 5 विकेट से हराया
2026-04-17 17:52
GT vs KKR: शुभमन गिल की दमदार पारी से जीती गुजरात टाइटंस, कोलकाता को 5 विकेट से हराया
GT vs KKR: गुजरात टाइटंस ने कोलकाता नाइट राइडर्स को 5 विकेट से हराया। इसके साथ ही गुजरात ने इस सीजन की तीसरी जीत हासिल की। वहीं कोलकाता नाइट राडइर्स को अभी तक एक भी जीत नहीं मिली है।
तेज धूप में घर रहेगा कूल-कूल! छत पर सफेद चूना लगाने से घर हो सकता है 5 डिग्री तक ठंडा, सिविल इंजीनियर ने बताया तरीका
2026-04-17 17:30
तेज धूप में घर रहेगा कूल-कूल! छत पर सफेद चूना लगाने से घर हो सकता है 5 डिग्री तक ठंडा, सिविल इंजीनियर ने बताया तरीका
How To Keep House Cool In Summer Without AC: अगर आप भी गर्मी से परेशान हैं तो छत को ठंडा करने का ये देसी तरीका जरूर जान लें.
Women's Reservation Bill: लोकसभा में क्यों गिरा महिला आरक्षण बिल, 2029 में लागू करने की थी तैयारी
2026-04-17 17:08
Women's Reservation Bill: लोकसभा में क्यों गिरा महिला आरक्षण बिल, 2029 में लागू करने की थी तैयारी
लोकसभा में 2029 तक महिला आरक्षण लागू करने वाला संविधान संशोधन बिल गिर गया। बिल को पास होने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला। इसके पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया। विपक्ष ने सरकार के इस कदम की जमकर आलोचना की।
गर्मी ने भड़काया नोएडा में मज़दूरों का गुस्सा, क्योंकि क्लाइमेट चेंज से सहनशक्ति कम हो रही है
2026-04-17 16:24
गर्मी ने भड़काया नोएडा में मज़दूरों का गुस्सा, क्योंकि क्लाइमेट चेंज से सहनशक्ति कम हो रही है
नई दिल्ली, 17 अप्रैल 2026 : आपको तो पता ही है दिनांक 13 अप्रैल 2026 को नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों में भीड़ उमड़ी। सेक्टर 60, 62, 84 की सड़कों पर हजारों मजदूर। मांगें साफ थीं, बेहतर वेतन, तय काम के घंटे, ओवरटाइम का हिसाब। चार दिन तक तनाव बढ़ा, हालात बिगड़े, और फिर सरकार ने अंतरिम वेतन वृद्धि की घोषणा की। नोएडा की मीडिया ने कहानी यहीं तक सुनाई गई, लेकिन क्या यह पूरी कहानी थी? Heatwave Triggers Labour Unrest in Noida as Workers Express Anger किसी ने ध्यान नहीं दिया लेकिन नोट करना जरूरी है, जब यह आंदोलन चल रहा था, उसी हफ्ते नोएडा का तापमान 36 से 39 डिग्री के बीच था, और 42 तक पहुंचने की चेतावनी दी जा रही थी। अप्रैल की शुरुआत ही उस तरह की गर्मी लेकर आई थी, जो बिना किसी शोर के शरीर को धीरे-धीरे थका देती है। सवाल सीधा है, क्या इस गर्मी ने आंदोलन की आग में घी का काम किया है? हो सकता है सबको समझ में नहीं आए लेकिन कुछ संकेत साफ दिखते हैं। जिन मजदूरों ने सड़कों पर उतरकर विरोध किया, वे ज्यादातर कॉन्ट्रैक्ट वर्कर थे। गारमेंट और होजरी सेक्टर से जुड़े हुए। वही सेक्टर, जिस पर हाल की रिसर्च बार-बार एक बात कह रही है, कि सबसे ज्यादा “हीट बर्डन” यही लोग झेलते हैं। फरवरी 2026 में आई स्टडी “ब्रेकिंग पॉइंट: हीट एंड द गारमेंट फ्लोर” ने दिल्ली-एनसीआर, तमिलनाडु और गुजरात की फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों से बात की। नतीजे असहज थे। 87 प्रतिशत मजदूरों ने पिछले एक साल में गर्मी से जुड़ी दिक्कतें बताईं, सिरदर्द, चक्कर, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन। 69 प्रतिशत ने माना कि गर्मी ने उनके काम की क्षमता घटाई। 78 प्रतिशत लोग ब्रेक छोड़ देते हैं, सिर्फ इसलिए कि टारगेट पूरा हो जाए। यानी जिस शरीर से काम लिया जा रहा है, वही शरीर धीरे-धीरे जवाब दे रहा है। फैक्ट्री के अंदर की गर्मी सिर्फ मौसम से नहीं बनती। मशीनें लगातार 100 डिग्री से ऊपर तापमान पैदा करती हैं। टिन या एस्बेस्टस की छतें उस गर्मी को रोकती नहीं, अंदर ही जमा करती हैं। हवा कम, नमी ज्यादा, और बीच में खड़ा एक मजदूर। यह गर्मी दिखाई नहीं देती, लेकिन असर छोड़ती है। पानी पीना भी आसान नहीं होता। कई मजदूर बताते हैं कि बार-बार टॉयलेट जाने की अनुमति लेना मुश्किल होता है, इसलिए पानी कम पीते हैं। नतीजा, डिहाइड्रेशन। स्टडी में लगभग आधे मजदूरों में इसके संकेत मिले। और फिर काम के बाद घर। यह कहानी का वह हिस्सा है, जो अक्सर छूट जाता है। नोएडा के ज्यादातर मजदूर 11 से 13 हजार रुपये महीना कमाते हैं। छोटे कमरों में रहते हैं, जहां कई लोग साथ होते हैं। दिन की गर्मी के बाद रात को राहत मिलनी चाहिए, लेकिन अब रातें भी गर्म हैं। World Health Organization के मुताबिक, शरीर को ठीक से आराम करने के लिए तापमान करीब 24 डिग्री होना चाहिए। लेकिन शहरों में रात का तापमान लगातार बढ़ रहा है। Council on Energy, Environment and Water (CEEW) के अनुसार, पिछले दशक में भारत के करीब 70 प्रतिशत जिलों में गर्म रातों की संख्या बढ़ी है। यानी शरीर को ठंडा होने का समय कम हो गया है। मौसम विशेषज्ञ Mahesh Palawat कहते हैं, “गर्मी अब रात में खत्म नहीं होती। जब शरीर को रिकवरी का मौका नहीं मिलता, तो डिहाइड्रेशन, थकान और दिल पर दबाव बढ़ता है।” यह “रिकवरी” की कमी, शायद इस पूरी कहानी की सबसे अहम कड़ी है। एक मजदूर जो दिनभर गर्मी में काम करता है, रात में भी शरीर को ठंडा नहीं कर पाता। अगली सुबह वह उसी थकान के साथ काम पर लौटता है। यह थकान जमा होती जाती है। और यही जमा हुई थकान, कभी-कभी गुस्से में बदल जाती है। CEEW के Vishwas Chitale बताते हैं, “करीब 60 प्रतिशत भारतीय जिले अब हाई या वेरी हाई हीट रिस्क में हैं। और गर्म रातें इस जोखिम को और बढ़ा रही हैं, क्योंकि शरीर को ठीक होने का मौका नहीं मिल रहा।” यहां एक और अहम बात है। एक अध्ययन के मुताबिक, हर 1 डिग्री तापमान बढ़ने पर मजदूर की रोज़ की कमाई में 16 प्रतिशत तक गिरावट आती है, जबकि खर्च बढ़ जाता है। यानी गर्मी सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं, आय का भी संकट है। इस पूरी तस्वीर में एक और परत जुड़ती है, नीति की। Global Climate and Health Alliance की Shweta Narayan कहती हैं, “उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में, जो एक्सट्रीम हीट के प्रति बेहद संवेदनशील है, हीट एक्शन प्लान को सिर्फ बाहर की गर्मी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। फैक्ट्री फ्लोर पर जो अदृश्य गर्मी है, उसे भी शामिल करना जरूरी है। मजदूरों की सुरक्षा सिर्फ पब्लिक हेल्थ का मुद्दा नहीं, बल्कि कंपनियों और राज्य दोनों की साझा जिम्मेदारी है। अगर स्पष्ट मानक और उनका पालन नहीं होगा, तो सबसे कमजोर मजदूरों को अपने जीवन और रोज़गार के बीच चुनना पड़ेगा।” यानी गर्मी सिर्फ बाहर की नहीं, अंदर की भी है। और वही ज्यादा खतरनाक है। Heat Watch की संस्थापक निदेशक Apekshita Varshney इस परत को और साफ करती हैं, “उत्तर प्रदेश का हीट एक्शन प्लान मजदूरों को संवेदनशील मानता है और पानी, छाया, ओआरएस जैसी बुनियादी चीजों की बात करता है। लेकिन ये उपाय टुकड़ों में हैं, और उन फैक्ट्रियों की असल चुनौती को नहीं पकड़ते जहां वेंटिलेशन खराब है, और लोग लंबे घंटे काम करने को मजबूर हैं। हमें सिर्फ योजनाओं से आगे बढ़कर लागू होने वाले, फंडेड समाधान चाहिए, जहां श्रम, स्वास्थ्य और शहरी विभाग मिलकर काम करें। वरना मजदूरों को कुछ नहीं मिलता, न अच्छी मजदूरी, न सुविधाएं, न सम्मानजनक जीवन।” यह बात आरोप की तरह नहीं, एक खाली जगह की तरह सामने आती है। जहां नीति है, लेकिन ज़मीन पर उसका असर अधूरा है। अब इस पूरे परिदृश्य को उस दिन की भीड़ के साथ जोड़कर देखें। लोग सड़कों पर थे, अपनी मजदूरी के लिए। लेकिन उनके शरीर पहले से थके हुए थे। गर्मी से, नींद की कमी से, लगातार दबाव से। Apekshita Varshney इसे एक “पॉलीक्राइसिस” कहती हैं, “मजदूर पहले से मुश्किल हालात में थे। अब एक्सट्रीम हीट ने इन समस्याओं को और गहरा कर दिया है। लोग बिना सुरक्षा के काम कर रहे हैं, और अपने तरीके से इस स्थिति से निकलने की कोशिश कर रहे हैं।” तो क्या गर्मी ने नोएडा के विरोध को भड़काया? सीधा जवाब शायद नहीं। लेकिन यह कहना भी मुश्किल है कि उसका कोई रोल नहीं था। कभी-कभी कहानियां एक वजह से नहीं बनतीं। वे कई परतों से मिलकर बनती हैं। नोएडा की उस दोपहर में, मजदूरी एक परत थी। काम के घंटे एक परत थे। और शायद, चुपचाप बढ़ती गर्मी भी एक परत थी, जो दिखी नहीं, पर महसूस हुई। क्योंकि जब शरीर लगातार दबाव में हो, तो आवाज़ सिर्फ शब्दों से नहीं निकलती। वह भीड़ में बदल जाती है। रिपोर्ट: निशांत सक्सेना लखनऊ ।
वर्ल्ड हेरिटेज डे: रोशनी से जगमगाया जहाज महल:कल मिलेगा स्मारकों में मुफ्त प्रवेश; यूनेस्को सूची के लिए प्रशासन ने भेजे नए प्रस्ताव
2026-04-17 16:16
वर्ल्ड हेरिटेज डे: रोशनी से जगमगाया जहाज महल:कल मिलेगा स्मारकों में मुफ्त प्रवेश; यूनेस्को सूची के लिए प्रशासन ने भेजे नए प्रस्ताव
विश्व विरासत दिवस पर शनिवार को मांडू के सभी केंद्रीय संरक्षित स्मारकों में पर्यटकों का प्रवेश निशुल्क रहेगा। भारतीय पुरातत्व विभाग इस दिन पर सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए विशेष आयोजन कर रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार रात जहाज महल को विद्युत रोशनी से रोशन किया गया। इंदौर कमिश्नर और धार कलेक्टर ने भेजे प्रस्ताव तत्कालीन इंदौर संभाग आयुक्त दीपक सिंह और तत्कालीन धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने मांडू को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए शासन को कई प्रस्ताव भेजे हैं। मांडू वर्तमान में यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल है। प्रशासन अब इसे पूर्ण विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने के लिए तकनीकी डोजियर तैयार करने के प्रयासों में जुटा है। मांडू में होंगी विविध गतिविधियां विश्व धरोहर दिवस पर मांडू में हेरिटेज वॉक, चित्रकला, वाद-विवाद और फोटो प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों का उद्देश्य मांडू की प्राचीन वास्तुकला, जल प्रबंधन प्रणालियों और सांस्कृतिक विरासत के प्रति आमजन को जागरूक करना है। एएसआई इस बार 'विरासत और जलवायु' विषय पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। 61 केंद्रीय और 14 राज्य संरक्षित स्मारक मौजूद ऐतिहासिक नगरी मांडू में बाज बहादुर-रानी रूपमती महल, हिंडोला महल, अशर्फी महल और होशंगशाह के मकबरे सहित कुल 61 केंद्रीय पुरातत्व विभाग के संरक्षित स्मारक हैं। इसके अलावा राज्य पुरातत्व विभाग के भी 14 स्मारक यहां स्थित हैं। मांडू को यूनेस्को की सूची में शामिल करने के लिए वर्ष 1998 से संघर्ष जारी है। प्राचीन जल संरचनाओं के संरक्षण पर विशेष फोकस पुरातत्वविद और एएसआई भोपाल मंडल के अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार कुर्मी ने बताया कि मांडू की प्राचीन जल संरचनाएं विश्व में अद्वितीय हैं। विभाग इन जलस्रोतों और स्मारकों के समूह को आधार बनाकर एक सशक्त प्रस्तुतिकरण तैयार कर रहा है। यूनेस्को में भारत का प्रतिनिधित्व एएसआई द्वारा किया जाता है, जिससे मांडू की दावेदारी अब और मजबूत हुई है।