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गुजरात में वोटिंग से पहले BJP का शक्ति प्रदर्शन, नवसारी में 41 सीटों पर निर्विरोध जीत
2026-04-13 21:28
गुजरात में वोटिंग से पहले BJP का शक्ति प्रदर्शन, नवसारी में 41 सीटों पर निर्विरोध जीत
BJP Unopposed Victory Gujarat: वोटिंग से पहले नवसारी में BJP का दबदबा, 41 सीटों पर निर्विरोध जीत। जानें गुजरात लोकल बॉडी चुनाव से जुड़ी पूरी खबर।
Kangra News: इच्छी में माता कुनाल पत्थरी की मूर्ति स्थापित
2026-04-13 20:06
Kangra News: इच्छी में माता कुनाल पत्थरी की मूर्ति स्थापित
सोमवार को वाग टीका इच्छी में माता कुनाल पत्थरी की मूर्ति की विधिवत स्थापना की।
युवक की पिटाई पर ग्रामीणों ने आधी रात थाना घेरा:अंबेडकर जयंती के पोस्टर फाड़ने और फायरिंग का आरोप, मुकदमा दर्ज करने के आश्वासन पर माने
2026-04-13 19:34
युवक की पिटाई पर ग्रामीणों ने आधी रात थाना घेरा:अंबेडकर जयंती के पोस्टर फाड़ने और फायरिंग का आरोप, मुकदमा दर्ज करने के आश्वासन पर माने
प्रयागराज के नवाबगंज में सोमवार रात एक युवक की पिटाई के बाद तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने आधी रात थाना घेर लिया और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए जमकर हंगामा किया। पुलिस के आश्वासन के बाद लोग शांत होकर लौटे। रात 8:30 बजे की घटना मामला नवाबगंज के बरीबोझ गांव का है। गांव निवासी दयाशंकर गौतम के अनुसार, सोमवार रात करीब 8:30 बजे वह गांव स्थित अंबेडकर पार्क में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में पोस्टर लगा रहे थे। इसी दौरान गांव के ही कुछ लोग वहां पहुंचे और पोस्टर-बैनर फाड़ने लगे। विरोध करने पर जातिसूचक गालियां दी पीड़ित का आरोप है कि विरोध करने पर आरोपियों ने जातिसूचक गालियां दीं और उसके साथ मारपीट की। इतना ही नहीं, फायरिंग भी की जिसमें युवक के सिर पर गंभीर चोट आई। 4 अज्ञात लोग भी थे हमलावरों के साथ हमलावरों के साथ चार अज्ञात लोग भी थे, जिन्होंने जयंती मनाने पर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और आक्रोशित होकर नवाबगंज थाने पहुंच गए। लोगों ने थाना परिसर का घेराव कर दिया और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गए। देर रात तक पुलिस ग्रामीणों को समझाने में जुटी रही। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीण शांत हुए और अपने घर लौटे। पुलिस का कहना है मामले में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी तक फायरिंग की पुष्टि नहीं हो पाई है। पोस्टर फाड़ने जैसी बात भी सामने नहीं आई है। डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया कि प्रारंभिक सूचना मारपीट की मिली थी। घायल युवक को अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया। फिलहाल तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
IITBHU में डायरेक्टर आफिस के बाहर विरोध:यूथ पार्लियामेंट्री चुनाव में गड़बड़ी का लगाया आरोप,बोले- पुन: जांच कराए प्रशासन
2026-04-13 19:18
IITBHU में डायरेक्टर आफिस के बाहर विरोध:यूथ पार्लियामेंट्री चुनाव में गड़बड़ी का लगाया आरोप,बोले- पुन: जांच कराए प्रशासन
आईआईटी बीएचयू में छात्रों ने डायरेक्टर ऑफिस का घेराव किया। जिसके बाद डायरेक्टर ने कुछ छात्रों से मुलाकात की। छात्रों ने आरोप लगाया है कि यूथ पार्लियामेंट्री चुनाव में गड़बड़ी की गई है। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि संस्था के अधिकारी उनकी बातों को नहीं सुन रहे हैं। छात्रों ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की है। छात्रों का आरोप है कि कुछ उम्मीदवारों ने विभिन्न कार्यक्रमों के नाम पर फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए हैं। इनमें टेक्नेक्स से जुड़े दस्तावेजों के अलावा “साइंस ऑफ यूटोपिया”, “उद्यम वॉलीबॉल”, “एयरोवर्स” के कथित मेरिट सर्टिफिकेट, “कॉस्मिक क्लासिफायर” और “सोलर नेक्सस” के कॉग्निजेंस प्रमाणपत्र तथा नेशनल चेस चैंपियनशिप से जुड़े प्रमाणपत्र शामिल बताए गए हैं। छात्रों ने इन सभी दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संस्था के मुख्य चुनाव अधिकारी को छात्रों ने लिखा पत्र छात्रों ने संस्थान के मुख्य चुनाव अधिकारी को पत्र लिखकर कहा है कि जिन उम्मीदवारों पर आरोप लगे हैं, उनकी उम्मीदवारी नियमों के अनुसार रद्द की जानी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि जब फर्जी प्रमाणपत्रों के मामले सामने आ रहे थे, तब भी चुनाव प्रक्रिया जारी रखना गंभीर अनियमितता को दर्शाता है। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि वीपी (वाइस प्रेसिडेंट) चुनाव के दौरान एक उम्मीदवार का बहिष्कार किया गया था और कई निर्वाचित सदस्य भी अलग हो गए थे, इसके बावजूद चुनाव संपन्न कराया गया। इस पर प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा गया है। 3-4 दिन में सम्पन्न होगी जांच निदेशक से मुलाकात कर लौटे एक छात्र ने बताया कि मामले की जांच में तीन से चार दिन का समय लग सकता है। हालांकि, छात्रों का कहना है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, उनका विरोध जारी रहेगा। प्राक्टर प्रो. संजय सिंह ने बताया कि शाम पांच बजे तक चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। किसी भी छात्र के विरुद्ध अब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी के जो भी आरोप लगे हैं, उनकी गहन जांच कराई जाएगी ताकि व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल हो सके।
फैमिली कोर्ट का आदेश ग्राम न्यायालय में ट्रांसफर नहीं:भरण-पोषण रोकने का मामला सक्षम परिवार न्यायालय में उठाएं
2026-04-13 18:58
फैमिली कोर्ट का आदेश ग्राम न्यायालय में ट्रांसफर नहीं:भरण-पोषण रोकने का मामला सक्षम परिवार न्यायालय में उठाएं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी मामले में फैमिली कोर्ट (पारिवारिक न्यायालय) द्वारा पक्षकारों के अधिकारों का निर्धारण करते हुए कोई आदेश पारित कर दिया गया है, तो उस मामले को बाद में सुनवाई या समीक्षा के लिए ग्राम न्यायालय को स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि उच्चतर न्यायिक सेवा संवर्ग के अधिकारी द्वारा पारित आदेश की समीक्षा सिविल जज (जूनियर डिवीजन) स्तर के अधिकारी द्वारा संचालित ग्राम न्यायालय नहीं कर सकता, क्योंकि यह न्यायिक मर्यादा और पदानुक्रम के प्रतिकूल है। पारिवारिक केस में हुआ आदेश यह निर्णय न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की एकल पीठ ने अमित कुमार राणा द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता की पत्नी विपक्षी को वर्ष 2019 में प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, बिजनौर द्वारा 3,000 रुपये मासिक भरण-पोषण देने का आदेश दिया गया था। बाद में, पत्नी के पुनर्विवाह के आधार पर याचिकाकर्ता ने धारा 127 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत भरण-पोषण आदेश को वापस लेने के लिए एक आवेदन दायर किया। इसी बीच, प्रशासनिक आदेशों के तहत यह मामला जिला न्यायालय से ग्राम न्यायालय, धामपुर स्थानांतरित कर दिया गया। ग्राम न्यायालय ने 25 मार्च 2025 और 1 अक्टूबर 2024 को आदेश पारित करते हुए याचिकाकर्ता के खिलाफ रिकवरी वारंट जारी कर दिया, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि ग्राम न्यायालय और फैमिली कोर्ट के बीच दंड प्रक्रिया संहिता के अध्याय IX (भरण-पोषण) को लेकर समवर्ती क्षेत्राधिकार होने से विसंगति पैदा हो रही है। उन्होंने तर्क दिया कि फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984 की धारा 8(बी) स्पष्ट रूप से मजिस्ट्रेट के क्षेत्राधिकार को वर्जित करती है जहाँ फैमिली कोर्ट स्थापित है। दूसरी ओर, ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008 की पहली अनुसूची के भाग II के तहत ग्राम न्यायालयों को भी भरण-पोषण के मामलों में राहत देने का अधिकार दिया गया है। अदालत ने अपने विस्तृत फैसले में माना कि ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008 और फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984 के बीच क्षेत्राधिकार का ओवरलैपिंग (अतिव्याप्ति) होना न केवल विसंगतिपूर्ण है, बल्कि इससे न्यायिक अनुचितता भी पैदा होती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भरण-पोषण का विषय विशेष रूप से परिवार न्यायालयों की योजना से संबंधित है और इसे ग्राम न्यायालयों के दायरे में लाना एक प्रकार से अनावश्यक है। हाईकोर्ट ने ग्राम न्यायालय द्वारा पारित दोनों विवादित आदेशों को रद्द कर दिया और यह व्यवस्था दी कि परिवार न्यायालयों में लंबित ऐसे मामले, जिनमें पक्षकारों के अधिकारों का निर्णय पहले ही हो चुका है , उन्हें ग्राम न्यायालय को नहीं भेजा जाना चाहिए। विशेष रूप से, दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं 126(2), 127 और 128 (जो अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 145(2), 146 और 147 हैं) के तहत लंबित मामलों को ग्राम न्यायालय में स्थानांतरित करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि ग्राम न्यायालयों में सीधे नए मामले दायर करने पर कोई कानूनी रोक नहीं है। याचिकाकर्ता को छूट दी गई है कि वह पुनर्विवाह के आधार पर भरण-पोषण रोकने का अपना मामला पुनः सक्षम परिवार न्यायालय के समक्ष उठा सकता है।
आरोप साबित हुए बगैर बर्खास्तगी सही नहीं : हाईकोर्ट:मनगढ़ंत आरोप का मामला, बेसिक शिक्षा अधिकारी मऊ का आदेश रद्द
2026-04-13 18:53
आरोप साबित हुए बगैर बर्खास्तगी सही नहीं : हाईकोर्ट:मनगढ़ंत आरोप का मामला, बेसिक शिक्षा अधिकारी मऊ का आदेश रद्द
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि जन्मतिथि में विसंगति के पीछे यदि याची की धोखाधड़ी की बात साबित नहीं होती है तो उसकी बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा काल्पनिक व मनगढ़ंत आरोप पर अपराध साबित हुए बगैर किसी को बर्खास्त नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान की एकलपीठ ने सहायक शिक्षक की बर्खास्तगी संबंधी बेसिक शिक्षा अधिकारी मऊ का आदेश रद्द कर दिया है। मऊ का है मामला मुकदमे से जुड़े तथ्य यह हैं कि याची विजय बहादुर यादव को सभी आवश्यक पात्रता मानदंडों को पूरा करने के उपरांत बीएसए मऊ के आठ अगस्त 2014 के आदेश से सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्ति दी गई। राजेश यादव ने 18 अक्टूबर 2018 को बीएसए से आरटीआइ के तहत याची के उन शैक्षणिक योग्यता प्रमाणपत्रों और मार्कशीट की प्रतियों की मांग की , जिनके आधार पर नियुक्ति दी गई थी। याची के अनुसार यह आवेदन कानूनी रूप से मान्य नहीं था फिर भी शिक्षा विभाग के अतिरिक्त निदेशक ने 26मार्च 2019 को जारी आदेश में उससे दस्तावेज मांगे। बीएसए ने 15 मई 2019 को नोटिस जारी किया, जिसमें याची को 30 मई 2019 को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित होने के लिए कहा गया था। यह सुनवाई 30 अप्रैल 2019 को प्रस्तुत प्रमाणपत्रों और मार्कशीट में कथित विसंगतियों के संबंध में थी। याची ने तीन जून 2019 को विस्तृत उत्तर में आरोपों का जवाब दिया। इसके बाद 27 जून 2019 को बीएसए ने याची को सेवा से बर्खास्त करने तथा उसके खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का निर्देश दिया। इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। जन्म तिथि को लेकर फंसा पेंच याची के अनुसार विवादित आदेश इस गलत धारणा पर आधारित है कि 1998 के हाई स्कूल प्रमाणपत्र में दर्ज जन्मतिथि में विसंगति है। इसमें जन्मतिथि दो जुलाई 1984 बताई गई है, जबकि पूर्व माध्यमिक प्रमाणपत्र में यह सात जुलाई 1987 है। याची का कहना है कि हाई स्कूल प्रमाणपत्र का न तो उन्होंने कभी उपयोग किया है और न ही इसे किसी भी चरण में प्रस्तुत किया गया। यह उनके रिकार्ड का हिस्सा नहीं है। इसलिए पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और कानूनी रूप से अस्थिर है। कोर्ट ने पाया कि ऐसा कोई स्पष्ट या पुष्ट आरोप नहीं है कि याची द्वारा प्रतिवादियों के समक्ष प्रस्तुत शैक्षिक दस्तावेज जाली, मनगढ़ंत या अन्यथा झूठे थे। कोर्ट ने कहा मनगढ़ंत काल्पनिक आरोप के आधार पर बिना अपराध साबित हुए सहायक अध्यापक को बर्खास्त नहीं किया जा सकता।और बी एस ए के बर्खास्तगी आदेश को रद कर याची की सेवा बहाली का निर्देश दिया है। हालांकि कि कोर्ट ने काम नहीं तो दाम नहीं के सिद्धांत को अपनाते हुए कहा कि जितनी अवधि तक याची सेवा से बाहर रहा वेतन पाने का हकदार नहीं होगा।और याचिका स्वीकार कर ली।
6 और गांवों में जमीन अधिग्रहण की तैयारी:नया गोरखपुर के लिए GDA बना रहा लैंड बैंक
2026-04-13 18:22
6 और गांवों में जमीन अधिग्रहण की तैयारी:नया गोरखपुर के लिए GDA बना रहा लैंड बैंक
गोरखपुर में बढ़ती आबादी के बीच आवासीय जरूरतों को पूरा करने की कवायद भी शुरू हो गई है। इसके लिए 6000 एकड़ में नया गोरखपुर विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में गुरुकुल सिटी बसाई जाएगी। कुछ गांवों में जमीन अधिग्रहण किया जा रहा है। अब गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) और जमीन लेने की तैयारी में है। इसके लिए 6 और गांवों में अधिग्रहण किया जाएगा। सदर एवं चौरी चौरा तहसील के इन गांवों में जमीन अधिग्रहण के लिए अनिवार्य अर्जन और लैंड पुलिंग पर भी विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण-नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत GDA की ओर से कुछ गांवों में अनिवार्य अर्जन की प्रक्रिया चल रही है। भविष्य में बैजनाथपुर, कुसम्ही,भैंसहा, रुद्रापुर, अराजी मतौनी और अराजी बसडीला में भूमि अधिग्रहण करने की तैयारी है। इन गांवों का दौरा GDA और तहसील की टीमों ने संयुक्त रूप से कर लिया है। बातचीत के आधार पर तय होगा मुआवजा इन गांवों में पहले लोगों से बातचीत की जाएगी कि वे अपनी जमीन दे दें। लोगों से बातचीत में जमीन अधिग्रहण की दर तय की जाएगी। सर्कल रेट के 4 गुना के बराबर मुआवजा देने का विकल्प दिया जा सकता है। किसानों को चिह्नित कर अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। लैंडपुलिंग के विकल्प भी देखेंगे जीडीए की बोर्ड बैठक में यह तय किया गया है कि लैंड पुलिंग के जरिए भी जमीन ली जाएगी। किसानों से आपसी सहमति के आधार पर जमीन खरीदने की तैयारी है। इसके अलावा किसानों से बातचीत की जाएगी। अगर इसपर बात नहीं बनी तो अनिवार्य अर्जन की ओर जाएंगे। सर्कल रेट न बढ़ने से किसान विरोध में GDA की ओर से पहले भी इस तरह के प्रयास किए गए हैं लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। किसान सर्कल रेट बढ़ाए बिना इस मुद्दे पर बात करने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि आने वाले समय में अनिवार्य अर्जन की राह पर ही GDA को जाना होगा।
बदायूं में जमीन विवाद में महिलाओं पर लाठी से हमला,VIDEO:पुलिस की मौजूदगी में मारपीट, मुकदमा दर्ज; जांच जारी
2026-04-13 18:11
बदायूं में जमीन विवाद में महिलाओं पर लाठी से हमला,VIDEO:पुलिस की मौजूदगी में मारपीट, मुकदमा दर्ज; जांच जारी
बदायूं के बिल्सी क्षेत्र में जमीन विवाद हिंसक हो गया। पुलिस की मौजूदगी में महिलाओं पर लाठियों से हमला किया गया, जिसका वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। बदायूं जिले के बिल्सी कोतवाली क्षेत्र के अहमदनगर असोली गांव में जमीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। सोमवार को हुए इस विवाद में महिलाओं पर लाठियों से हमला किया गया, जबकि मौके पर पुलिस भी मौजूद थी। बताया जा रहा है कि गांव में दो पक्षों के बीच जमीन को लेकर पुराना विवाद चल रहा था, जो अचानक बढ़ गया और दोनों ओर से लाठी-डंडे चलने लगे। हालात बिगड़ते देख डायल 112 को सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद महिलाओं पर लाठियां बरसाई जाती रहीं और पुलिस समय रहते हस्तक्षेप नहीं कर सकी। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें लोग एक-दूसरे पर हमला करते नजर आ रहे हैं और पुलिसकर्मी स्थिति को नियंत्रित करने में असफल दिख रहे हैं। वीडियो में कुछ लोग यह कहते भी सुनाई दे रहे हैं कि पुलिस ने मौके से आरोपियों को नहीं पकड़ा। पुलिस के अनुसार, एक पक्ष की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और उसी पक्ष को ज्यादा चोटें आई हैं। पुलिस का कहना है कि वीडियो वायरल करने वाले लोग भी आरोपियों में शामिल हैं, जिन्हें बुलाकर मेडिकल परीक्षण कराया गया है। एसपी देहात डॉ. हृदेश कठेरिया ने बताया- मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है। सीओ बिल्सी केके तिवारी ने पुष्टि की कि जमीन विवाद में मारपीट हुई थी। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों का मेडिकल कराया गया है और मामले की जांच जारी है।
संभल में 7 खंड शिक्षा अधिकारी बदले:मुंशीलाल पटेल को 3 सर्किल का अतिरिक्त प्रभार, बीएसए ने आदेश जारी किया
2026-04-13 18:03
संभल में 7 खंड शिक्षा अधिकारी बदले:मुंशीलाल पटेल को 3 सर्किल का अतिरिक्त प्रभार, बीएसए ने आदेश जारी किया
संभल के शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल किया गया है। नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही सात खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) का तबादला कर दिया गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) अलका शर्मा ने सोमवार को इस संबंध में आदेश जारी किया। जारी तबादला सूची के अनुसार, मुंशीलाल पटेल को खंड शिक्षा अधिकारी बनियाखेड़ा नियुक्त किया गया है। उनके पास बहजोई और चंदौसी सर्किल का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। अन्य तबादलों में, पोप सिंह को खंड शिक्षा अधिकारी असमोली और विनोद कुमार को खंड शिक्षा अधिकारी पंवासा बनाया गया है। विनोद कुमार मेहरा को रजपुरा की जिम्मेदारी दी गई है। अरुण कुमार को खंड शिक्षा अधिकारी गुन्नौर नियुक्त किया गया है। अंशुल कुमार को संभल का खंड शिक्षा अधिकारी बनाया गया है, जहां वे नगर संभल का भी कार्यभार देखेंगे। देवेंद्र कुमार सिंह को जुनावई का खंड शिक्षा अधिकारी नियुक्त किया गया है। गौरतलब है कि इस फेरबदल से एक दिन पहले, जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने भी चार पीसीएस अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया था। इसमें गुन्नौर और चंदौसी के एसडीएम भी शामिल थे।
संभल सांसद बर्क बोले-अखिलेश की टिप्पणी सही:पुलिस-प्रशासन पर लगाए सत्ता के इशारे पर काम करने के आरोप
2026-04-13 17:59
संभल सांसद बर्क बोले-अखिलेश की टिप्पणी सही:पुलिस-प्रशासन पर लगाए सत्ता के इशारे पर काम करने के आरोप
संभल से सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने सपा विधायकों को लेकर अखिलेश यादव की टिप्पणी का समर्थन किया। साथ ही उन्होंने पुलिस-प्रशासन पर सत्ता के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने सोमवार रात अपने आवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान यह बात कही। सांसद बर्क ने संभल एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई और बरेली साउथ एसपी अंशिका वर्मा के जोधपुर में आयोजित रिसेप्शन में शामिल हुए सपा विधायकों पर अखिलेश यादव की टिप्पणी को लेकर कहा, “जब हमारे नेता ने टिप्पणी कर दी है, तो मुझे कुछ कहने की जरूरत नहीं है। वो हमारे नेता हैं और उनकी बात ही अंतिम है। मैं समझता हूं कि उन्होंने जो कहा है, वह सही है।” उन्होंने कहा कि वह अपने नेता के खिलाफ बयान नहीं दे सकते और अखिलेश यादव ने लोगों की भावना को ध्यान में रखकर ही बयान दिया होगा। पुलिस-प्रशासन पर निशाना साधते हुए बर्क ने आरोप लगाया कि अधिकारी सत्ता के इशारे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संवैधानिक रूप से मिली मजहबी स्वतंत्रता को कोई नहीं छीन सकता, हालांकि लोगों को परेशान जरूर किया जा सकता है। योगी आदित्यनाथ के कुओं को कब्जा मुक्त कराने के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन ने इस कार्रवाई के जरिए अपनी पीठ थपथपाने का काम किया है और सरकार की नजरों में अच्छा बनने की कोशिश की है। बर्क ने कहा कि जिन कुओं की बात की जा रही है, उनका उपयोग समय के साथ बंद हो गया था और किसी ने उन पर कब्जा नहीं किया था। अगर अब उन्हें फिर से चालू किया जा रहा है, तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लोगों को अपने-अपने धार्मिक कार्य करने की संवैधानिक आजादी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका मजहब किसी अन्य धर्म में हस्तक्षेप की इजाजत नहीं देता और सभी को अपने अधिकारों के तहत स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।